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Suresh Oberoi Biography | सुरेश ओबराय जीवनी | Suresh Oberoi

Suresh Oberoi Biography | सुरेश ओबराय जीवनी | Suresh Oberoi

Suresh Oberoi Biography | सुरेश ओबराय जीवनी | Suresh Oberoi
Suresh Oberoi Biography | सुरेश ओबराय जीवनी | Suresh Oberoi
Suresh Oberoi
ये तो दिया हिंदुस्तान की सबसे मशहूर ऐक्टर्स में से एक क्यों पहचाना नहीं नाम सुरेश ओबरॉय सोना भी महंगा होता है नहीं बनते आनंद स्वरूप राय और माँ करता देवी इनका जन्म हुआ बलूचिस्तान के क्वेटा इलाके में भारत

के विभाजन के बाद उनके परिवार को भागना पड़ा और चले आए हैदराबाद के चार भाई बहन रहे यानी कि एक बड़ा था हेदराबाद में इनके दिन बड़े मुफलिसी में कट रहे थे और तब इनके पिता ने यह फैसला लिया जो शायद

कोई और नहीं ले सकता था इनके पिता दोबारा पाकिस्तान गए भेस बदल गए थे और बची खुची प्रॉपर्टी बेचकर वापस हिंदुस्तान और किसी तरह से अपना मेडिकल स्टोर्स का बिज़नेस शुरू किया कि सिस्टम ने मुझे चंदिया वो

मुझसे तुम से भागकर आए कस्टम विनाश को फांसी की सजा दी और मुझे सिक्स्टी में काम करने से इनकार कर देता तो ऐसी कोई और खेलता और मैं नौकरी से ज्यादा हेदराबाद में इनके मेडिकल स्टोर के सामने एक स्वेटर

था वह भी अक्सर नए नए फ़िल्म के पोस्टर्स लगते हैं और नन्हे सुरेश ओबरॉय को भी लगता है कि किसी तरह से यह भी फिल्मों का हिस्सा बन जाएं हालांकि सात वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला नाटक किया था स्कूल के

 दिनों में चुकी हैं बॉयज स्कूल में पढ़ते थे इसलिए उन्हें लड़ क्या किरदार निभाना पड़ा था और पुरानी कहावत है इंस्पेक्टर साल ग्राहक द्वारा समंदर में ही जाकर मिलता है यह अक्सर अंग्रेजी फिल्मों देखती है और दिलीप Suresh Oberoi

कुमार की ऐक्टिंग से खासमखास रहे हालांकि ये डॉक्टरी बनना चाहते थे लेकिन डांस एक्शन टेबल पे एक मरे हुए मेहनत को देखकर उन्होंने डॉक्टर बनने का आइडिया छोड़ दिया फिर बनना चाहते थे मैकेनिकल इंजिनियर पर ऐक्टिंग के बारे में उन्होंने सोचा नहीं था इनका का दरअसल कम है और लोग उन्हें अक्सर गेट को कैसे

पकाते थे अभी सब कुछ सही चल रहा था सुरेश ओबेराय के जीवन में इनके पिता अरे हाथ हो गया जब मैं भाई और पिता के साथ वैष्णो देवी गए थे जहाँ पर उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उनका देहांत हो गया Suresh Oberoi

उन्होंने कॉलेज में एडमिशनस लिया पर ये उनके बड़े भाई जगमोहन मिल के मेडिकल स्टोर का बिज़नेस उतनी चला सके क्योंकि ये दोनों इतने चालाक नहीं थे धीरे धीरे सुरक्षाबलों की आवाज़ रेडियो स्टेशन तक ले गई और

 फिर यह पहुँच गए फ़िल्म टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एल फैक्टर ये तुम्हारा प्लेस्टेशन नहीं चावल का चक्रव्यूह है जहाँ से तुम्हारा पाप चलने लगीं पक्ष के निकल पाया ये बात भी आपको हैरान करेगी जब जीएसटीआर पहुंचे उसके कुछ दिनों परSuresh Oberoi

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