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Biography of rakesh roshan | Rakesh roshan biography

Biography of rakesh roshan | Rakesh roshan biography

Biography of rakesh roshan | Rakesh roshan biography
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 Rakesh roshan biography
महान संगीतकार रोशन साथ में पढ़े बैठे दूसरे डायरेक्ट था राकेश रोशन जो पीछे शिक्षा रिकवरी के दिन लक्षण दिल को छोड़ा पीछे बजाए रहे आ रहे कुछ बच्चों को चोरी चाकरी तरीका रहते है अच्छे दिल को चुरा के चले

 जाये रहे रखा है जबकि मुख्य शिकायत मुझे नाटक जगह मुझे पैसे रूप से मान्य बनाए हुए हैं और हम रह रहे काफी स्टॉक साहब का जन्म छे सितंबर साल उन्नीस सौ उनचास में हुआ चुकी इनके वाले रोशन चौधरी कलेक्टर थे और फिल्मों में संघ दिया करते थे इस वजह से रक्त सोशल बचपन से ही फ़िल्म की दुनिया से जुड़ गए यह

बात गौर करने लायक है जब राकेश रोशन साहब पहचान हुआ था तब उसके बाद देन एक अजब मुफलिसी के दौर से गुजर रहे थे आलम ये था यह मुंबई के वर्सोवा इलाके के गराज में रहा करते थे धीरे धीरे हालात बेहतर हुए

 और राकेश रोशन साहब को पढ़ने के लिए सतारा सैनिक स्कूल भेज दिया गया वहाँ से यहाँ पहुंचे वाडिया कॉलेज वे राजभूषण के लिए ही पढ़ाई चल रही थी कि उन्हें एक गहरा झटका लगा राकेश रोशन को अपनी

पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी क्योंकि उनके पाले रोशन गुजर गए थे ये बहुत बड़ा फैसला लेना था राकेश रोशन को और ये पुणे से मुंबई आ गए परिवार की जिम्मेदारी इनके ऊपर थी छोटे भाई राजेश रोशन अभी बाकी बहुत छोटे

 थे और तब के फैसला किया उन्होंने यह महान रिक्टर हरनामसिंह वेल जाने की इच्छा प्रबल के आश्रम बन जाएंगे बतौर अध्यक्ष इंद्र की शुरुआत कर दी उन्होंने चौथे ई मेल एक्टर से बन गए डाइरेक्ट पर नौजवान राकेश रोशन के मन में कह सकती कि वे एक्टर बनें एकटी राहणे नजर नहीं आ रही थी बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर

काम चल रहा था और तब जुबली कुमार के नाम से मशहूर राजेंद्र कुमार साहब ने राकेश रोशन से कहा कि बेटा तुम एक्टिंग करना चाहते हो या डिरेक्शन सही सही बताओ तब राकेश रोशन ने कहा कि करता तो मैटिंग चाहता

 हूँ लेकिन कोई सूरत नजर नहीं आती और राजेंद्र कुमार साहब की वजह से उन्हें मेरी फ़िल्म घर घर की कहानी उसके बाद उस दौर के नंबर वन हीरोइन हेमा मालवीय के साथ ही नजर आए फ़िल्म पराया धन में पर ऐक्टिंग में
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 Rakesh roshan biography
बात बन नहीं रही थी खेल का मैदान नहीं जब आता है सीटी बजाता बहुत देर तक जब देखो मुझे डांटती रहती है वो इस तरह की ऊँचाई चाहते थे वैसा कुछ भी हो रहा था और तब राकेश रोशन को लगा कि सारा काम तो

प्रदूषण करता है चुनाव में खुद फ़िल्म प्रोड्यूस करू खुद ही कहानी चुनें और फिर ऐक्टिंग के मैदान में खुद के प्रड्यूसर बनें अप्रेंटिस की आप के दीवाने यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल न दिखा सकी उसके

 बाद फ़िल्म कामचोर भी बनाए पर बतौर एक्टर इनकी बात नहीं रही थी इनकी हीरोइन इनसे आगे बढ़ती जा रही थी जैसे की फ़िल्म कामचोर में उनकी हीरोइन

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