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Kumar Sanu Biography | Kumar sanu biography in hindi | कुमार सानू जीवनी


Kumar Sanu Biography | Kumar sanu biography in hindi | कुमार सानू जीवनी
Kumar Sanu Biography | Kumar sanu biography in hindi | कुमार सानू जीवनी

साथ ही मेरे सुन तो ज़रा हाँ हाँ ये दास्तां है केदारनाथ की वहीं केदारनाथ जिन्हें हम कुमार सानू के नाम से जानते है साथी मेरे सुन तो ज़रा लेंगे नम्म उनके जो तेरी है हाँ मैं पहले तेरी पूजा सफल नहीं हो कुमार सानु भी शत्रु बार सन में हुआ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर शानू भट्टाचार्य के नाम से की थी उन्हें बांग्लादेशी फ़िल्म

तीन कन्या मिली थी अब पहला मैच बॉलीवुड सॉन्ग मिला था हीरो हीरालाल इससे पहले ये फ़िल्म आशिकी नहीं मीलती इनकी जिंदगी में क्या होता है चढ़ा रहे ज़रा उन पर नजर डालते हैं एक बार प्यार से धुआं ध्यान से तू मेरे यहाँ आकर इनके पिता का नाम पशुपति नाथ भट्टाचार्जी था वो शिवभक्त रहे हैं इसलिए इनका नाम भी

केदारनाथ रखा पर उन्हें अपना नाम ख़ास पसंद नहीं था इनकी शुरुआती ट्रेनिंग हुई कल्या भाई आनंद भाई के साथ उन्होंने कहा कि तुम्हारी आवाज़ बड़ी सुरीली है और तुम्हारा बंगाली एक्शन कुछ ज़्यादा ही कड़ा है इसलिए नहीं इनका नाम बदलने की राय भी दी गई और कहा कि अपना नाम कुमार रख लो वैसे घर में शानू बुलाया

जाता था इसलिए उनका नाम हो गया कुमार शानू पढ़ाई लिखाई में उनकी ख़ास दिलचस्पी नहीं थी ये बचपन से ही हुनर मंद थे और तबला बजाते बजाते गाना गा लिया करते थे इनके बड़े भाई बेहेन दरअसल एक ऑर्केस्ट्रा ग्रुप काम करते थे बस जब बड़े हुए तो बताओ रिदम प्लेयर उन्होंने वही ओर्केस्ट्रा जॉइन कर लिया गायकी के ऊपर

कोई पाबंदी नहीं थी पर उनके पिताजी चाहते थे की पढ़ाई खूप करे बचपन में कोलकाता शहर में उन्होंने खयाल ठुमरी फोक संगीत सब सुना क्या मेरी जा रहा हूँ जाना मेरी जहाँ नम इनके पिता बहुत बड़े पूरी लगाया रहे सन्

उन्नीस सौ उनासी में ये बताओ सिंगर काम करने लगे स्टेज शोज बार और उन्होंने मिनिट नाम के होटल में काम करना शुरु किया बतौर सिंगर शहर कोलकाता ही था तकरीबन चार हज़ार रुपये महीना वेतन मिला करती थी

यह अक्सर किशोरदा की ग़ज़लें गाया करते थे जब होटेल में बतौर सिंगर काम कर रहे थे तब उन्हें लगा कि क्यों ना ये हॉलीवुड में काम करने लगे कोलकाता छोड़कर चले आए मुंबई इनके पिता नहीं चाहते थे की मुंबई आए उन्होंने किसी से ग्यारह सौ रुपये उधार लिए अपने बड़े भाई से और कहा क्या मैं मुंबई जा रहा हूँ यह साल का

 समय उन्नीस सौ छियासी मुंबई के वाशी इलाके में रहें अपने कुछ साथियों के साथ सिंदूर की आराधना के स्टार्स में उन्हें नौकरी भी मिल गयी और दिन के साथ उन्होंने गाना गाया था मेरे नैना सावन भादो और बताओ टेप इन्हें नौ हज़ार रुपये मिले थे दूसरे गाने के लिए पांच हज़ार रुपये जबकि किशोर दा के गाने रिकॉर्ड कर रहे थे तभी उनकी मुलाकात हुई महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह जी से उसे

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