AUTHOR

Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में

 Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में

Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में
Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में


सर्वश्रेष्ठ वो किसी ने कहा मोशन सुन सुपरस्टार हीरो और यह नाम भी दिया गया शैक्षिक संन्यासी हम बात कर रहे हैं जबरदस्त एक्टर विनोद खन्ना की आत्म विकास की मून को भी तो मन्मा उम्र माना तो कहते होता विनोद खन्ना का जन्म छह अक्टूबर सन् उन्नीस सौ छियालीस पेशावर में हुआ वो पेशावर जो पाकिस्तान है आतंकी की माँ कमला और पिता किशन चंद खन्ना इनकी तीन बहनें और एक भाई है उनके जन्म के बाद हिंदुस्तान आजाद


हुआ और बंटवारे की आपाधापी में उन्हें मुंबई ले आया क्या इनकी शुरुआती पढ़ाई हुई क्वीन्स मैरी स्कूल में और उसके बाद इनसे जेवियर स्कूल में भेज दिया गया माजी लगता है आप ने भी उन्हें गुरु शिक्षा पाई है तुम से पहले अभी मुंबई में उनका बचपन पढ़ ही रहा था आपकी पहुँच गए दिल्ली और वहाँ के दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड में इनकी पढ़ाई जारी रही आप अच्छी तरह जानते हैं विनोद खन्ना साहब में काफी स्कूल बदले इन्हें बाद में


बांस स्कूल जो लाली जो कि नासिक में है वह भेजो किया गया चिकित्सा कहती हैं जब कहा जाता है पर सवार होकर पटना यूं तो विनोद खन्ना बचपन से ही बड़े शर्मीले व्यक्तित्व के इंसान रहे लेकिन बच्चे आते हैं लेकिन लड़कियों से भविष्य आते है लेकिन एक टीचर नए प्रोत्साहित किया थोड़ी सी जबरदस्ती की और उनसे कहा की तुम्हे स्टेज पे ऐक्टिंग करनी होगी डरते घबराते विनोद खन्ना ने स्टेज पे ऐक्टिंग कर डाली और उस नाटक के बाद

विनोद खन्ना का जीवन परिचय
Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में
Vinod Khanna Biography in Hindi | विनोद खन्ना का जीवन परिचय | विनोद खन्ना की जीवनी हिंदी में

Vinod Khanna Biography in Hindi 
विनोद खन्ना की दिलचस्प ऐक्टिंग बढ़ने लगी गौर से देख लो कही मैं वही तो नहीं हूँ इस बीच उन्होंने फ़िल्म देखी सोलवा साल और मुगले आजम इन फिल्मों का इतना गहरा असर रहा कि उन्हें एक्टिंग की तरफ धकेलता गया कोई कुमाता हम चारी अगर पिछले तो घास भी हो जाएंगे लेकिन नारी अगर फैसले तो उसे कोई किनारा नहीं मिलता विनोद खन्ना साहब एक व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते थे फिल्मों से दूर दूर तक कोई ताल्लुक नहीं


जब उन्होंने अपने बाल दिन से कहा कि मुझे एक्टिंग करनी है तब तो घर में हंगामा हो गया पिता की तरफ से सख्त मुखालफत हो रही थी परमाणु सहयोग दिया और बाप बेटे के झगड़े मेंवही मंजूर थी चलो यही सही मेरी किस्मत ही अपना छीन लेती अभी दो साल का वक्त बिता भी नहीं था कि विनोद खन्ना को सुनील दत्त साहब ने फ़िल्म प्रो़ड्यूस की मन का मीत है यह फ़िल्म उन्होंने अपने छोटे भाई के थी और इसमें विनोद खन्ना को बतौर विलन दिया गया था विनोद खन्ना कभी काम मिला और उनका चरित्र ज़रा निगेटिव शेड लिए हुए था अरे हारी हुई बाजी में तुझे सब जीतने नहीं दूंगा नीचे का

Post a comment

0 Comments