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Rajinikanth Biography in Hindi | रजनीकांत का जीवन परिचय | रजनीकांत जीवनी

 Rajinikanth Biography in Hindi | रजनीकांत का जीवन परिचय | रजनीकांत जीवनी

 Rajinikanth Biography in Hindi | रजनीकांत का जीवन परिचय | रजनीकांत जीवनी
 Rajinikanth Biography in Hindi | रजनीकांत का जीवन परिचय | रजनीकांत जीवनी

 Rajinikanth Biography in Hindi 
अलग था प्रभावित वक्त नाम रखा गया शिवाजीराव गायकवाड बार जब यह सिल्वर स्क्रीन पर हाँ हैं तो सभी ने कहा हैलो रजनी सा माइन्ड ठऱवले था रजनीकांत साहब भजन संध्या में बारह दिसंबर को हुआ था जन्म हुआ महाराष्ट्र परिवार में माँ धर्मादाय एक हाउस वाइफ थी और पिताजी रामोजी राव गायकवाड़ एक पुलिस कांस्टेबल वो तो देखो कितना अच्छा हूँ वहाँ क्या हो जाएगा रास्ता हैं तो जमाने में वो बैंगलोर मैसूर स्टेट में गिना जाता था जो


की आज की तारीख में कर्नाटक का है इन साहब का नाम शिवाजीराव गायकवाड़ रखा गया था महान शख्सियत छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर पांच में दम हो तो छोटी बात पर ही हो जाती है और कान के पर्दे फाड़ देती है बचपन में ही उन्होंने मराठी और कनाडा दो की इनके चार भाई बहन रहे और रजनीकांत सबसे छोटे बड़े भाई सत्यनारायण राव और नागेश्वर राव और बहन अस्पष्ट बल्लू भाई इनके पिताजी के रिटायरमेंट के बाद उनका

 Rajinikanth Biography in Hindi 
 Rajinikanth Biography in Hindi | रजनीकांत का जीवन परिचय | रजनीकांत जीवनी
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रजनीकांत जीवनी
परिवार ओके हनुमंत नगर इलाके में पहुँच गया युवक था जब मात्र नौ वर्ष के थे और छठ महिमा गुजर गयी हालांकि रजनीकांत साहब की पढ़ाई लिखाई चलती रही यह कभी परम गवर्नमेंट कनाडा मॉडल प्राइमरी स्कूल में पढ़ते रहे परीक्षा खत्म हो गया खत्म होने वाला है उनका दाखला रामकृष्णा मिशन के एक मैच में करा दिया गया था जहाँ पर भारतीय संस्कृति और इतिहास में सिखाया जाता है और वहाँ पर ही ये ड्रामा में हिस्सा लिया


 करते थे याद रखना धर्म पॉप करने वाले आतंकियों का दास वगैरह हैं सही मायनों में ग्रामीण ऐसा आया जिसके बाद रजनीकांत को लगा कि उन्हें ऐक्टिंग करनी है महाभारत की कहानी पर आधारित था ड्रामा जिसमें रजनीकांत ने मतलब एक दोस्त का किरदार निभाया था कल कभी दिया बेंद्रे ने फॉर्म देखी थी और मंत्रमुग्ध हो गए और इस बार दस इंसान अकेला पूरी फौज को नेस्तनाबूत कर देता है समझे महाभारत की मिसाल को भूला

रजनीकांत का जीवन परिचय

 बैठे हम बाद में उसका स्कूल बदला गया और यह चार पाठशाला पब्लिक स्कूल में आ गए यहाँ पर भी ये अक्सर स्कूल के नाटकों में हिस्सा लिया करते नहीं ये बात तो बिना समझे बोल गए अभी तो शुरुआत की है मैने बच्चों घर के हालात ठीक नहीं थे रजनीकांत साहब पढ़ाई के साथ साथ बड़े अलग अलग काम करते रहे कभी खुली बने कभी कारपेंटर और फिर जब बैंगलोर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज में बस कंडक्टर बनकर आए नौकरी के लिए वे क्या हैं


नौकरी में थोड़ी गई है एक तरफ बस कंडक्टर चल रही थी तो दूसरी तरफ गंदा नाटककार टोपी मुनियप्पा ने इन्हीं किरदार दिया और इस मौके को उन्होंने खुद लाभ उठाया उसके बाद इन्हें मद्रास फ़िल्म इंस्टीट्यूट के बार

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