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गुलशन बावरा जीवनी - Biography of Gulshan | Gulshan Bawra Biography in Hindi

गुलशन बावरा जीवनी - Biography of Gulshan | Gulshan Bawra Biography in Hindi

गुलशन बावरा जीवनी - Biography of Gulshan | Gulshan Bawra Biography in Hindi
गुलशन बावरा जीवनी - Biography of Gulshan | Gulshan Bawra Biography in Hindi

चली मुझे क्या हुआ क्या गुब्बारे यह दास्तां है ऐसे कलाकार की जिसने अपने बचपन में ही बड़ा भयंकर क़त्लेआम देखा लेकिन बड़े होकर अपनी शायरी से अपने गीतों से सभी का मन लुभाया नाम है उनका गुलशन कुमार था जो फ़िल्म इंडस्ट्री ने गुलशन बावरा के नाम से बहुत मशहूर हुए जाने मुझे क्या पता नहीं भाई नहीं था उनका जन्म हुआ बारह अप्रैल सन् उन्नीस सौ सैंतीस में जगह शेखूपुरा पंजाब जो कि उस वक्त ब्रिटिश इंडिया का

हिस्सा था विभाजन के बाद पाकिस्तान में हैं उनके पिताजी का एक बिज़नेस था बिज़नेस अच्छा चल रहा था हंसता खेलता परिवार था लेकिन तभी भारत का विभाजन हुआ और विभाजन में वो कत्लेआम मचा बहुत से लोगों का घर तबाह हो गया इसमें गुलशन कुमार मेहता घर भी शामिल था इनकी आँखों के सामने इनके पिताजी को तलवार से मार दिया गया उनकी माँ को गोली मार दी गयी ये अपने बड़े भाई के साथ ही खेत में छिपे रहे और

 Gulshan Bawra Biography in Hindi

कुछ दिनों के बाद यदि ट्रक में बैठकर हिंदुस्तान की सरहद में आ गए उनकी बड़ी बहन जो की जयपुर में रहीं उन्होंने दोनों भाइयों का भरण पोषण किया कुछ वक्त बाद इनके बड़े भाई की नौकरी लगी दिल्ली में भाई बहन गुलशन कुमार मेहता ने भी अपनी ग्रेजुएशन पूरी की कॉलेज के दिनों में ही गुलशन जी को शादी का शौक चढ़ा

जाते थे की फिल्मों में काम बने उनका नाम हो और मुफलिसी का आलम था कुछ भी नहीं थी तब उन्होंने रेलवे की नौकरी के लिए अर्जी दी इनका सेलेक्शन हुआ और उन्हें राजस्थान के कोटा शहर भेज दिया गया यहाँ पर किस्मत ने बहुत जब खेल खेला जिसकी उम्मीद तो कुछ भी नहीं कर रहे थे जबकि राजस्थान पहुंचे तो पता चला की वेकेंसी तो पहले से ही भरी जा चुकी है बाद उन्हें मुंबई में बतौर क्लर्क पोस्ट कर दिया गया ये साल था सन्


उन्नीस सौ पचपन गुलशन कुमार मेहता ने अपना संघर्ष शुरू किया बतौर गीत का इतना ये वो करा ये किस्सा बड़ा मशहूर हाँ ये गुलशन कुमार मेहता से गुलशन बावरा कैसे बन गए महान संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी जब शुरुआत कर रहे थे तब मीनाकुमारी जो बलराज साहनी की फ़िल्म नहीं सकता भाषा उस वक्त

गुलशन बावरा जीवनी 
फ़िल्म के डिस्ट्रीब्यूटर शांतिभाई पटेल ने गुलशन कुमार मेहता को देखा और उन्होंने एक बड़ी अजब सी शर्ट पहनी हुई थी और शांतिभाई पटेल को इस बात का यकीन नहीं हो रहा था कि एक नौजवान गाने लिख सकता है बस उन्होंने कह दिया की यार ये तो बावरा

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