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om puri biography in hindi ओमपुरी पुरी जीवनी हिंदी में

Om puri biography in hindi ओमपुरी पुरी जीवनी हिंदी में

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 मंच हो टेलीविजन या फिर सिनेमा अपने अभिनय और अपनी आवाज़ के जादू से उन्होंने सबका दिल जीत लिया
ना ओमपुरी पूरा नाम ओम राजेश पुरी भगवान ने. मुझे कुछ दिया नाम इस तलत चार जन अक्टूबर सन् उन्नीस सौ पचास में हुआ जन्म का स्थान पंजाब का शहर पटियाला ओम पुरी साहब के बाद शुरुआती दौर में इंडियन आर्मी में काम किया करते थे.

ओमपुरी पुरी जीवनी हिंदी में

 और बाद में रेलवेज में आ गए और यही वजह थी. कि अभिनय में कदम रखने से पहले उन पर खुद ये चाहते थे कि वो भी फौज का हिस्सा बनाएं और शायद मतलब कुछ और ही मंजूर था. यही नहीं बदकिस्मती एक लंबा सफर ननने ओमने तय करना था और जिंदगी ये तय कर रही थी कि ये बच्चा आगे. जाकर मनोरंजन की दुनिया में अपना नाम कमाएगा चालाकी करने की इस मत करना पड़ा मेरे बारे में तुम जान ही चूके हों जैसे अमूमन हर कलाकार के साथ होता है कुछ बहन के साथ भी हुआ अपने कॉलेज के दिनों में ही ये ड्रामा कॉम्पीटिशन में .


ओमपुरी पुरी जीवनी हिंदी में
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हिस्सा लिया करते थे एक ऐसी ही प्रतियोगिता के दौर आना पंजाब के मशहूर रंगकर्मी हरपाल तिवाना की नजर उनपर पड़ी और उनसे कहा कि क्यों नहीं तो मेरे थिएटर ग्रुप में आजाओ हाँ आज तो ओम पुरी साहब ने कहा कि देखिये मेरे हालत ठीक नहीं है दिन में काम करता हूँ बतौर लैब असिस्टेंट और शाम को कॉलेज में पढ़ाई करता हूँ लिहाजा मेरे पास समय नहीं है और मुझे बतौर तनख्वाह एक सौ पच्चीस रुपए मिलते हैं ये सुनते ही देवाण सामने कहा ठीक है मैं तुम्हें डेढ़ सौ दूंगा और तुम्हारे साथ हम सुबह रोशन किया करेंगे और तुम इस वर्ष इवनिंग कॉलेज में रहो और अगले साल मॉर्निंग कॉलेज में दाखिल हो जाना उस वक्त डिप्टी कमीश्नर कपूर साहब भी इनके ग्रुप की सहायता किया करते थे और एक बज रहे हैं क्योंकि वहाँ कोई सरकारी नौकरी भी मिल गई थी हम तरफ के रिडक्शन देखना चाहते हैं अलग एक मिनट यक्तित् को दिखा







दिया था बादल से जूझ रही क्यों पूरी बचपन में ,बहुत शर्मीले थे पर बड़े होकर जब रंगकर्मी बने तब इनका मन हुआ क्यों ना राष्ट्रीय, नाट्य विद्यालय का हिस्सा ,बनना चाहिए और विधिवत तरीके से अभिनय का प्रशिक्षण किया जाए और ठीक वैसा हुआ भी खोयी खड़े ऐसी बातें फ़ोन पर नहीं की जाती इधर आओ फिर बात करते जो की, बहुत शर्मीले थे और ,उस वक्त एनएसजी में ब्राह्मण का शीशा पढ़ा करते थे, जो कि अंग्रेजी एक्चुअल लेते हैं और ,अंग्रेजी इनके सर के ऊपर जाया करती थी, अपने शर्मीले व्यक्ति के कारण यह खुल के बोल, नहीं पाए कि अंग्रेजी समझ नहीं आ रही है, और बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा, है और तब अब्राहम अलकाजी साहब ने ओम पुरी के से कहा कि जाओ इस बात करो पूछो की इतना ,परेशान क्यों रहता है और जब बताया गया कि अंग्रेजी के कारण ऐसा हो रहा है, तब वे ब्राह्मण का दिशा ने कहा कि, देखो मेकअप में तुम बहुत अच्छे हो इम्प्रोवाइजेशन में बहुत अच्छे,

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